The Market Segment

Segment Defined

Non–Corporate Small Business Segment (NCSBS) comprising of millions of proprietorship / partnership firms running as small manufacturing units, shopkeepers, fruits / vegetable vendors, truck operators, food-service units, repair shops, machine operators, small industries, artisans, food processors and others, in rural and urban areas, whose financing needs are less than 10 lakh.

As mentioned, according to NSSO Survey (2013), there are 5.77 crore1 small business units, mostly individual proprietorship, which run small manufacturing, trading or services activities.

1 Key Results of Survey on Unincorporated Non-agricultural Enterprises (Excluding Construction) in India NSS 67th Round (July 2010-2011)

The Stakeholders

Besides the NCSBS, the other market stakeholders include Micro Finance Institutions (NBFC-MFIs, SHGS, Other formats like Trusts, Societies etc.), Commercial Banks, Regional Rural Banks, Co-operative Banks, Small Business Finance Companies (SBFC), Last Mile Financiers (LMFs), State level/Regional level co-coordinators.

The non-market stakeholders include the governments, peer/activists and social groups, business support groups, general public, community, media etc.

Market Stakeholders Defined

The support would be routed through a wide variety of market participants in the form of Last Mile Financiers such as Small Finance Banks, trusts, societies, associations and other networks that are providing financing to small businesses

Similarly, the State Level/Regional Level Coordinators such as Existing NBFCs, Regional Rural Banks, Commercial Banks, Co-operative Banks, etc., will provide the linkage to Last Mile Financiers.

  • MUDRA envisages to recognize the whole category of institutions which could be called Small Business Finance Entities, on the lines of Housing Finance Companies & Infrastructure Finance Companies
  • MUDRA's definition of MFIs is expected to create a new language and definition of Small Business Finance Entities.

Broad Guidelines for Coverage of and Support to Beneficiary Units

A minimum of 60% of support would flow to enterprises in the smallest segment.

Partner intermediaries of MUDRA Bank shall endeavour to adhere to the following broad framework :

  • First time entrepreneurs, youth entrepreneurs (i.e. entrepreneurs aged upto 30 years) and women entrepreneurs shall be encouraged and special schemes shall be designed for such entrepreneurs.
  • Emphasis shall be on cash flow based lending and not security based lending. Collateral securities, etc. shall be avoided.
  • Repayment obligations shall be flexible and framed keeping in view the business cash flows of the entrepreneur.

The Opportunity – Market Size

According to the study conducted by ICRA, "Microfinance Institutions: Prospects Favourable, but Access to Capital Holds the Key – Industry Outlook and Performance of Microfinance Institutions," the potential size of the microfinance market (which comprises the Self Help Group Bank linkage and Microfinance Institutions) is as large as 1.4 - 2.5 lakh crore at penetration levels of 50-70% and average ticket sizes from 35,000-45,000 per household.

At 100% penetration level and ticket size per household of 50,000, the potential market for microfinance is estimated to be 2.69 lakh crore2.

According to the report prepared by International Finance Corporation in association with Government of Japan, titled, "Micro, Small and Medium Enterprise Finance in India," the demand supply gap for the MSME sector is estimated to be around 3.57 lakh crore3.

The task at hand is herculean. MUDRA is expected to bridge the gap and create an inclusive economic architecture.

2 Source: Industry Outlook and Performance of Microfinance Institutions by ICRA 2013

3 Micro, Small and Medium Enterprise Finance in India, IFC and Govt. of Japan Study 2012

बाज़ार घटक

घटक की परिभाषा

गैर-निगमित लघु व्यवसाय घटक (एनसीएसबीएस) में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की ऐसी लाखों एकल-स्वामित्व/भागीदारी-आधारित फर्में शामिल हैं, जो लघु विनिर्माण इकाई, दुकानदार, फल/सब्जी विक्रेता, ट्रक-परिचालक, भोजन-सेवा इकाई, मरम्मत की दुकान, मशीन-परिचालक, लघु उद्योग, दस्तकार, खाद्य प्रसंस्करणकर्ता तथा अन्य रूपों में कार्यरत हैं तथा जिनकी वित्तीय आवश्यकता १० लाख रुपये से कम है।

जैसाकि कहा जा चुका है, एनएसएसओ के सर्वेक्षण (२०१३) के अनुसार देश में ५.७७ करोड़ लघु व्यवसाय इकाइयाँ हैं, जो लघु विनिर्माण, व्यापार एवं सेवा-गतिविधियाँ चलाती हैं। इनमें से ज्यादातर एकल स्वामित्व में हैं।

भारत के गैर-निगमित कृषीतर उद्यम (निर्माण से इतर) संबंधी सर्वेक्षण के मुख्य निष्कर्ष, एनएसएस, ६७वाँ चक्र (जुलाई २०१० - २०११)

हितधारक

एनसीएसबीएस के अलावा, अन्य बाज़ार हितधारक हैं- अल्प वित्त संस्थाएँ (गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी-अल्प वित्त संस्थाएं, स्व-सहायता समूह, अन्य प्रकार जैसे- न्यास, समिति आदि), वाणिज्य बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक, लघु व्यवसाय वित्त कंपनियाँ (एसबीएफसी), अन्तिम बिन्दु वित्त-प्रदायक (एलएमएफ), राज्य-स्तरीय/क्षेत्र-स्तरीय समन्वयक।

गैर-बाज़ार हितधारकों में शामिल हैं- सरकार, साथी/कार्यकर्ता समूह, व्यवसाय सहायता समूह, आम जनता, समुदाय, मीडिया आदि।

बाज़ार हितधारक की परिभाषा

अन्तिम छोर के वित्तदाता- छोटे बैंक, भागीदारियाँ, कंपनियाँ, न्यास, समितियाँ, संघ एवं अन्य नेटवर्क जो लघु व्यवसाय को वित्त देते हैं।

राज्य-स्तरीय/ क्षेत्र-स्तरीय समन्वयकः मौजूदा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, वाणिज्य बैंक, सहकारी बैंक, जो अन्तिम छोर के वित्तदाता को जोड़ेंगे।

  • ‘मुद्रा’ का इरादा सभी वर्गों की संस्थाओं को मान्यता देने का है, जिनको समग्रतः लघु व्यवसाय वित्त कंपनी (एसबीएफसी) कहा जा सकता है, जैसेकि आवास वित्त कंपनियों, मूलभूत संरचना वित्त कंपनियों आदि को कहा जाता है।
  • आशा है कि अल्प वित्त संस्था की मुद्रा द्वारा दी गई परिभाषा से एसबीएफसी की एक नई भाषा व परिभाषा का निर्माण होगा।

लाभार्थी इकाइयों को कवर करने तथा सहायता प्रदान करने हेतु व्यापक दिशानिर्देश

– न्यूनतम ६०% सहायता "शिशु" वर्ग के उद्यमों को जाएगी।

– मुद्रा बैंक के साझेदार मध्यवर्ती निम्नलिखित व्यापक ढाँचे के अनुपालन का प्रयास करेंगे:

  • पहली बार के उद्यमी, युवा उद्यमी ( अर्थात ३० वर्ष तक के उद्यमी) और महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाएगा और उनके लिए विशेष योजनाएँ तैयार की जाएंगी।
  • नकद प्रवाह आधारित ऋण पर बल होगा न कि प्रतिभूति आधारित ऋण पर। संपार्श्विक प्रतिभूतियों आदि से बचा जाएगा।
  • चुकौती दायित्व लचीले होंगे और उद्यमी के व्यवसाय नकदी प्रवाह को देखते हुए तय किए जाएंगे।

अवसर – बाजार की व्याप्ति

आईसीआरए(इकरा) द्वारा संपन्न अध्ययन के अनुसार, – "अल्प वित्त संस्थाओँ की संभावनाएँ अनुकूल है, किन्तु पूंजी तक पहुंच की दृष्टि से उद्योग का दृष्टिकोण एवं अल्प वित्त संस्थाओं के कार्यनिष्पादन का विशएष महत्व है।" अल्प वित्त बाजार (जिसमें स्व-सहायता समूह बैंक लिंकेज एवं अल्प वित्त संस्थाएं शामिल हैं) का शुरूआती फैलाव यदि ५०-७०% स्तर तक हो तथा ३५,००० - ४५,००० प्रति परिवार के आकार के हिसाब से हो, तो इसका संभावित आकार १.४ खरब से २.५ खरब जितना होगा।

१००% तक फैलाव होने पर तथा ५०,०००/- प्रति परिवार के आकार के हिसाब से संभावित अल्प वित्त बाजार २.६९ खरब जितना बड़ा होने का अनुमान है।

जापान सरकार के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम द्वारा "भारत में अल्प, लघु एवं मध्यम उद्यम का वित्तीयन" शीर्षक से तैयार रिपोर्ट के अनुसार भारत में एमएसएमई क्षेत्र का मांग व आपूर्ति अंतराल लगभग ३.५७ खरब है।

यह एक अतिविशाल कार्य है। आशा है कि मुद्रा इस अंतराल की पूर्ति करेगा तथा समावेशी आर्थिक संरचना का निर्माण करेगा।

स्रोत – आईसीआरए(इकरा) २०१३ द्वारा किया गया अल्प वित्त संस्थाओं का औद्योगिक परिदृश्य एवं निष्पादन अध्ययन।

भारत में अल्प, लघु एवं मध्यम उद्यम का वित्तीयन, अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम एवं जापान सरकार का अध्ययन, २०१२

"MUDRA is a refinancing Institution. MUDRA does not lend directly to the micro entrepreneurs / individuals. Mudra loans under Pradhan Mantri Mudra Yojana (PMMY) can be availed of from nearby branch office of a bank, NBFC, MFIs etc. Borrowers can also now file online application for MUDRA loans on Udyamimitra portal (www.udyamimitra.in).

Note: There are no agents or middleman engaged by MUDRA for availing of Mudra Loans. The borrowers are advised to keep away from persons posing as Agents/ facilitators of MUDRA/PMMY."

"मुद्रा एक पुनर्वित्त संस्था है। मुद्रा माइक्रो उद्यमियों / व्यक्तियों को सीधे नहीं उधार देते हैं। प्रधान मंत्री मुद्री योजना (पीएमएमवाई) के तहत मुद्री ऋण एक बैंक, एनबीएफसी, एमएफआई आदि के पास शाखा कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं। उधारकर्ता अब भी कर सकते हैं मुद्रामित पोर्टल (www.mudramitra.in) पर मुद्रा ऋण के लिए ऑनलाइन आवेदन करें। मुद्रा ऋणों का लाभ उठाने के लिए मुद्रा द्वारा कोई एजेंट या मध्यस्थ नहीं जुड़ा हुआ है। उधारकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे मुद्रा के एजेंट के रूप में पेश होने वाले व्यक्तियों से दूर रहें।“

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